muthai praneeta meshram

रायपुर। शहर के पंडरी बाजार में प्रणीता मेश्राम के इरादे मामूली नहीं हैं। कक्षा 12वीं में पढ़ने वाली प्रणीता, म्यूथाई खेल में इतनी निपुण हैं कि उनकी झोली में पुरस्कारों की झड़ी लग गई है। प्रणीता के पिता ठेले पर चाय बेचकर परिवार की गाड़ी चलाते हैं लेकिन बेटी के सपनों को साकार करने के लिए वह भी जी-जान से जुटे हैं। मां गायत्री भी बेटी की राह में कोई रोड़ा नहीं आने देतीं। परिवार के इसी सकारात्मक माहौल ने इस खेल प्रतिभा से खिलवाड़ नहीं होने दिया।

रायपुर। शहर के पंडरी बाजार में प्रणीता मेश्राम के इरादे मामूली नहीं हैं। कक्षा 12वीं में पढ़ने वाली प्रणीता, म्यूथाई खेल में इतनी निपुण हैं कि उनकी झोली में पुरस्कारों की झड़ी लग गई है। प्रणीता के पिता ठेले पर चाय बेचकर परिवार की गाड़ी चलाते हैं लेकिन बेटी के सपनों को साकार करने के लिए वह भी जी-जान से जुटे हैं। मां गायत्री भी बेटी की राह में कोई रोड़ा नहीं आने देतीं। परिवार के इसी सकारात्मक माहौल ने इस खेल प्रतिभा से खिलवाड़ नहीं होने दिया।

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