gopal mishra

भिलाई। छत्तीसगढ़ मास्टर माइंड प्रतियोगिता में तीसरा स्थान बनाकर सुर्खियों में आए गोपाल मिश्रा का जीवन भी संघर्ष की दास्तान है। इस प्रतियोगिता में 2300 बच्चों ने भाग लिया था। पर कहते हैं जहां चाह होती है, वहां राह भी निकल आती है। वह इसका जीता जागता मिसाल है। शकुंतला स्कूल के 11वीं कक्षा का गणित का यह विद्यार्थी मेधावी है। वह सेना में जाना चाहता था। पर घर वालों ने मना कर दिया। इसके पीछे भी एक दुखद दास्तान है। उसके पिता स्व. सुबोध कुमार मिश्रा निजी क्षेत्र में गार्ड का काम करते थे। अक्टूबर 2012 की एक काली रात में उन्होंने ड्यूटी करते हुए अपनी जान गंवा दी।

भिलाई। छत्तीसगढ़ मास्टर माइंड प्रतियोगिता में तीसरा स्थान बनाकर सुर्खियों में आए गोपाल मिश्रा का जीवन भी संघर्ष की दास्तान है। इस प्रतियोगिता में 2300 बच्चों ने भाग लिया था। पर कहते हैं जहां चाह होती है, वहां राह भी निकल आती है। वह इसका जीता जागता मिसाल है। शकुंतला स्कूल के 11वीं कक्षा का गणित का यह विद्यार्थी मेधावी है। वह सेना में जाना चाहता था। पर घर वालों ने मना कर दिया। इसके पीछे भी एक दुखद दास्तान है। उसके पिता स्व. सुबोध कुमार मिश्रा निजी क्षेत्र में गार्ड का काम करते थे। अक्टूबर 2012 की एक काली रात में उन्होंने ड्यूटी करते हुए अपनी जान गंवा दी।

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