इंदौर। किला मैदान रोड के पास फुटपाथ पर लोहा पीटने की आवाज के बीच से ‘अ’ अनार का, ‘आ’ आम का और ‘दो एकम दो… दो दूनी चार…’ की आवाज सुनाई पड़ती है। फुटपाथ पर टंगे बोर्ड और बारहखड़ी के पोस्टर खुद ब खुद निगाह उस तरफ खींच लेते हैं। पंद्रह-बीस के समूह के बीच बैठे मास्टरजी बच्चों को पढऩे-लिखने और अच्छा इंसान बनने की नसीहत देते हैं। जहां इस व्यस्त जीवनशैली में लोगों के पास अपने बच्चों को पढ़ाने का समय नहीं है, वहीं किला मैदान वीआईपी रोड पर फुटपाथ पर भटकने वाले बच्चों के लिए रोज क्लास लगती है।












