सोहागपुर (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश )। महाशिवरात्री के पावन पर्व पर एक मेला पचमढ़ी में लगता है जिसमें बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से लोग आते है और चौरागढ़ जैसी ऊंची पहाड़ी पर स्थित भगवान शंकर की प्रतिमा पर त्रिशूल चढ़ाकर मन्नत मांगते है। तो दूसरा मेरा सोहागपुर के प्राचीन पाषाण शिवपार्वती मंदिर पर लगता है। सतपुड़ा की वादियों में पचमढ़ी में ही भगवान शिव के स्थान नहीं है बल्कि कामती रेंज की बीट शंकरगढ़ में भी एक ऐसी प्राचीन शिव मूर्ति है जिसे हजारों साल पहले एक पहाड़ी में खुदाई कर बनाया गया है। यह प्रतिमा आज भी उसी स्वरूप में है जिसमें इसे तरासा गया है। शंकरगढ़ की चट्टान में मौजूद इस प्रतिमा की खासियत है कि इस तक बारिश का पानी भी नहीं पहुंचता है। शंकरगढ़ में मौजूद इस अष्ट भुजा वाली शंकर प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि पहले कभी यहां आदिवासियों द्वारा विशाल पूजा की जाती थी। जो लोग यहां मन्नत मांगते है उनकी मन्नत जरूर पूरी होती है। भगवान शंकर की इस मूर्ति के सामने कई वर्ष पुराना एक घंटा भी चट्टान में लगाया गया है।












