गलत हाथों में गया तो भस्मासुर भी बन सकता है AI : रक्षा मंत्री

गलत हाथों में गया तो भस्मासुर भी बन सकता है AI : रक्षा मंत्री

नई दिल्ली (इंटरनेट डेस्क)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तुलना पौराणिक राक्षस ‘भस्मासुर’ से की है। उन्होंने कहा कि अगर एआई गलत हाथों में पड़ जाए तो सब कुछ तबाह हो जाएगा। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दोहरे इस्तेमाल की दुविधा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीप फेक्स, साइबर युद्ध और ऑटोनॉमस वीपन सिस्टम्स ने रक्षा क्षेत्र में नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

AI के इस्तेमाल की तुलना पौराणिक राक्षस ‘भस्मासुर’ से करते हुए रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि अगर यह तकनीक गलत हाथों में पड़ जाए, तो यह कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है। ANI नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जब हम प्रतिरोध की बात करते हैं, तो हम AI की सिर्फ अच्छी तस्वीर ही नहीं देख सकते। रक्षा मंत्री के तौर पर, मुझे देश की सुरक्षा व्यवस्था को बहुत विस्तार से समझने का अवसर मिला है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक, रजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें  AI से जुड़ी चिंताएं भी नजर आती हैं। आज, डीप फेक्स, साइबर युद्ध और ऑटोनॉमस वीपन सिटम्स नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं, और हमें इन चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि ये चुनौतियां भविष्य में कम नहीं होंगी; बल्कि, ये और बढ़ेंगी। हमें यह भी समझना होगा कि हर तकनीक के दो पहलू होते हैं, और जब बात AI की आती है, तो यह दोहरे इस्तेमाल की दुविधा और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
रक्षा मंत्री ने कहा, “एक शक्तिशाली सामान्य-उद्देश्य वाला AI मॉडल जो सॉफ्टवेयर में कमजोरियों को खोज सकता है और उनका फायदा उठा सकता है। यह मॉडल, जो बैंकिंग सिस्टम, अस्पतालों और पावर ग्रिड को मजबूत कर सकता है, अगर गलत हाथों में चला जाए, तो इन सभी को तबाह भी कर सकता है। भगवान शिव ने उसे एक वरदान दिया था, लेकिन वही वरदान उसके लिए एक खतरा बन गया।”

हालांकि, भारतीय सशस्त्र बलों के साथ AI को जोड़ने के विषय पर राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इसके उपयोग और ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की सटीकता बढ़ाने में इसकी भूमिका का जिक्र किया। रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में AI के उपयोग के उदाहरण के तौर पर ‘सुदर्शन एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम’ का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, सुदर्शन एयर डिफेंस एक बहुत बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेहतरीन उपयोग का एक शानदार उदाहरण है। हमारे सशस्त्र बलों ने भी AI, मशीन लर्निंग और बिग डेटा साइंस का उपयोग करके, AI-आधारित उभरती चुनौतियों के जवाब में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है; जो भविष्य में उन्हें और भी अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में प्रभावी साबित होगा।
रक्षा मंत्री ने कहा, “मेरा मानना है कि ऐसी नई उभरती टेक्नोलॉजी की मदद से, हमारा देश न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित बनेगा, बल्कि ज्यादा सशक्त और समृद्ध भी होगा… ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में, हमने अपनी अत्याधुनिक ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम से लेकर अपने सर्विलांस प्लेटफ़ॉर्म तक, हर जगह AI का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया है। इससे हमारी सटीकता बढ़ी है और हम अपनी मारक क्षमता को अगले स्तर तक ले जा पाए हैं।”

हालांकि रक्षा मंत्री ने कहा, “AI को लेकर मेरा नजरिया सिर्फ युद्ध तक ही सीमित नहीं है। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि आज AI हमारी कार्य संस्कृति, हमारे सैनिकों के कल्याण और हमारे जीवन स्तर को बेहतर बनाने का एक शक्तिशाली माध्यम बन गया है। हमने अपने पेंशनभोगियों और पूर्व सैनिकों के लिए एक पोर्टल भी तैयार किया है। एक AI-सक्षम चेक बोर्ड के जरिए, हमने पेंशन से जुड़ी प्रक्रियाओं को और भी आसान बना दिया है।”

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