इम्प्लांट निकालने के लिए नहीं करनी होगी सर्जरी, शरीर में ही घुल जाएंगे

इम्प्लांट निकालने के लिए नहीं करनी होगी सर्जरी, शरीर में ही घुल जाएंगे

IIT Bhilai के शोधकर्ताओं ने विकसित की स्वदेशी बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट तकनीक

भिलाई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के शोधकर्ताओं ने बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट (शरीर में स्वतः घुलने वाले इम्प्लांट) विकसित करने की स्वदेशी तकनीक खोजकर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के ‘एडवांस्ड मटेरियल्स डेवलपमेंट एंड कैरेक्टराइजेशन ग्रुप’ (AMDCG) ने टाइटेनियम कोटिंग के साथ मैग्नीशियम (Mg) मिश्र धातु आधारित एक ऐसा इम्प्लांट तैयार किया है, जो उपचार प्रक्रिया पूरी होने के बाद मानव शरीर के भीतर सुरक्षित रूप से घुलने में सक्षम है।
डॉ. जोस इमानुएल के मार्गदर्शन में पीएचडी छात्र श्री विग्नेश आर. के नेतृत्व में इस शोध दल ने चिकित्सा विज्ञान की एक पुरानी चुनौती का समाधान खोजा है। दरअसल, मैग्नीशियम मिश्र धातुएं हड्डियों के उपचार के लिए बेहतरीन मानी जाती हैं, लेकिन शरीर के भीतर इनका क्षरण बहुत तेजी से होता है। शोध टीम ने एक ऐसी तकनीक स्थापित की है जो मैग्नीशियम मिश्र धातु पर टाइटेनियम की एक सघन और पतली परत चढ़ा देती है। यह सफलता धातु के घुलने की दर को नियंत्रित करने में मदद करती है, जिससे उपचार के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान इम्प्लांट की मजबूती बनी रहती है।
अपनी इस खोज के बारे में बताते हुए श्री विग्नेश आर. ने कहा कि शोध के दौरान यह प्रमाणित हुआ है कि टाइटेनियम कोटिंग के माध्यम से बायोडिग्रेडेशन (घुलने) की दर को 7.66 मिमी/वर्ष से घटाकर 2.93 मिमी/वर्ष किया जा सकता है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि भविष्य में मरीजों को शरीर से हड्डी के पेंच या स्टेंट निकालने के लिए दोबारा सर्जरी के दर्द और खर्च से नहीं गुजरना पड़ेगा। ये इम्प्लांट ठीक होने तक अपनी मजबूती बनाए रखेंगे और बाद में स्वतः ही शरीर में विलीन हो जाएंगे।
डॉ. जोस इमानुएल ने कहा कि यह देश में उन्नत दीर्घायु वाले बायोडिग्रेडेबल इम्प्लांट विकास की दिशा में संस्थान का पहला और महत्वपूर्ण कदम है। इस अध्ययन के परिणाम हाल ही में प्रमुख वैज्ञानिक पत्रिकाओं में से एक ‘डिस्कवर मटेरियल्स’ में प्रकाशित हुए हैं। शोध समूह का अगला कदम पशु परीक्षणों की ओर बढ़ने से पहले बायो-डिग्रेडेशन प्रक्रिया के दौरान कोशिका वृद्धि का अध्ययन करना होगा। गौरतलब है कि श्री विग्नेश आईआईटी भिलाई में सीनियर टेक्निकल सुपरिटेंडेंट के रूप में संस्थान की सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी का कार्यभार भी संभाल रहे हैं।

#IIT_Bhilai #Soluble_medical_Implants #AMDCG

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *