खुद मरकर दो लोगों को नया जीवन दे गया सुनील कुमार, राज्य में 13वां मामला

खुद मरकर दो लोगों को नया जीवन दे गया सुनील कुमार, राज्य में 13वां मामला

रायपुर। राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन छत्तीसगढ़ द्वारा यह जानकारी गर्व एवं गहन भावनाओं के साथ साझा की जा रही है कि रायपुर निवासी स्वर्गीय श्री सुनील कुमार (उम्र 39 वर्ष) के अंगदान ने दो लोगों को नई जिंदगी प्रदान की है। उनका यह महान कार्य मानवता और संवेदनशीलता का प्रेरणादायक उदाहरण है।
23 मार्च को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद सुनील कुमार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें ब्रेन डेथ घोषित किया गया। इस कठिन समय में उनके परिवार ने अद्वितीय साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अंगदान के लिए सहमति प्रदान की।
18 अप्रैल की शाम, उनकी दोनों किडनियों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण 39 एवं 45 वर्षीय दो व्यक्तियों में किया गया, जो क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित थे। यह केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन के पुनर्जन्म की प्रेरक कहानी है—जहां एक व्यक्ति अपने जाने के बाद भी दूसरों में जीवित रहता है।
सुनील कुमार अपने परिवार के आधार स्तंभ थे और पांच सदस्यों की जिम्मेदारी निभा रहे थे। जीवन के अंतिम क्षणों में भी उन्होंने मानवता के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हुए दो जिंदगियों को जीवनदान दिया। उनका यह निःस्वार्थ कार्य समाज को यह संदेश देता है कि अंगदान वास्तव में “महादान” है।
छत्तीसगढ़ में यह 13वां अंगदान है, जिससे अब तक कुल 52 सफल प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं, जिनमें 25 किडनी, 8 लीवर, 5 हार्ट वाल्व, 20 कॉर्निया एवं 3 स्किन ग्राफ्ट शामिल हैं। यह आंकड़े प्रदेश में अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता और स्वीकृति को दर्शाते हैं।
अब तक 3076 से अधिक लोगों ने अंगदान की शपथ ली है, जिससे यह जीवन रक्षक अभियान और मजबूत हो रहा है। राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन सभी नागरिकों से अपील करता है कि वे इस अभियान से जुड़ें और अंगदान को जन-आंदोलन बनाएं।
अंगों के त्वरित और सुरक्षित परिवहन के लिए पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला के नेतृत्व में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिसने प्रत्यारोपण की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस पूरी प्रक्रिया में एम्स रायपुर के विभिन्न विभागों—नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसियोलॉजी, ट्रॉमा, न्यूरोसर्जरी, सीसीयू टीम एवं फॉरेंसिक विभाग—का उत्कृष्ट समन्वय रहा। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन टीम के सदस्य श्री विषोक, सुश्री विनिता एवं सुश्री अम्बे ने विशेष रूप से समन्वय एवं क्रॉस-मैचिंग में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अमानाका के पूर्व थाना प्रभारी श्री भरत बारेठ का एनओसी एवं पोस्टमार्टम संबंधी औपचारिकताओं को समय पर पूर्ण कराने में विशेष सहयोग रहा।
श्री बालाजी अस्पताल की विशेषज्ञ टीम—डॉ. देवेंद्र नाईक (स्वामी), डॉ. पुष्पेंद्र नाईक (गैस्ट्रो सर्जरी), डॉ. सूरज जाजू (यूरोलॉजी सर्जन), डॉ. विवेक वाधवा (कार्डियोलॉजिस्ट), डॉ. साईनाथ पट्टेवार (नेफ्रोलॉजिस्ट) एवं डॉ. रवि धर (नेफ्रोलॉजिस्ट)—ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर श्री दीपक मौर्य एवं श्री कृष्णकांत साहू का योगदान भी सराहनीय रहा।
राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन की टीम का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। संयुक्त संचालक डॉ. वरुण अग्रवाल एवंकंसलटेंट गीतिका ब्रम्हभट्ट ने पूरे प्रत्यारोपण प्रक्रिया के समन्वय में अहम भूमिका निभाई और उनकी मेहनत इस जटिल प्रक्रिया की सफलता में निर्णायक सिद्ध हुई।
सुनील कुमार का यह त्याग केवल दो लोगों के लिए जीवनदान नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अमिट प्रेरणा है। उनका योगदान सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहेगा।

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