बकरे के खून का टीका लगाने के बाद अंगारों पर चलकर करते हैं गृह प्रवेश
रायगढ़। जिले के बिलासपुर गांव में विवाह की एक अनूठी परम्परा है। यहां दूल्हा दुल्हन ढोल नंगाड़ों की गूंज के बीच जलते अंगारों पर चलकर नवजीवन में प्रवेश करते हैं। इससे पहले उनका उपवास शुरू हो जाता है। दूल्हा-दुल्हन को बकरे के खून का टीका लगाया जाता है। फिर वे अंगारों पर चलकर अपने घर में प्रवेश करते हैं।
बिलासपुर जिला मुख्यालय से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर स्थित है। राठिया परिवार के गंधेल गोत्र के लोग जब शादी करके दुल्हन घर लाते हैं, तब उन्हें यह परम्परा निभानी पड़ती है। देवी देवताओं की पूजा अर्चना करने के बाद शादी के मंडप में अंगारे बिछा दिए जाते हैं। दुल्हा – दुल्हन के साथ ही परिवार के अन्य सदस्य भी अंगारों पर चलते हैं।
घर के मुखिया के अनुसार दुल्हन घर से विदाई के बाद से दुल्हा – दुल्हन के अलावा परिवार के कुछ सदस्यों का उपवास शुरू हो जाता है। इस दौरान वे लोग पानी तक ग्रहण नही करते। मंडप में बकरे की बलि दी जाती है। इसके खून से दूल्हा-दुल्हन दोनों का टीका किया जाता है। घर के मुखिया पर देवता सवार हो जाता है। वह नाचते-झूमते जलते हुए अंगारो को मंडप पर बिछाता है। इन अंगारों पर वह स्वयं, दूल्हा-दुल्हन के अलावा परिवार के अन्य सदस्य नंगे पैर चलकर फेरे लेते हैं।
कई साल से चली आ रही परंपरा
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि बिलासपुर गांव की जनसंख्या तकरीबन 11 सौ के आसपास है और इस गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र के दो ही परिवार हैं। उनका कहना है कि वे लोग अपने बचपन से देखते आ रहे हैं जब भी इस परिवार में शादी होती है, दुल्हा, दुल्हन और परिवार के कई सदस्य अंगारों में चलकर इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। शादी के बाद दूल्हा जब दुल्हन लेकर अपने गांव लौटता है, तब उन्हें घर के बाहर ही किसी और की परछी में घंटों तक भूखे प्यासे ही रुकाया जाता है, जिसके बाद बकरे की बलि देकर खून से तिलक लगाकर दुल्हा और नई दुल्हन को घर में प्रवेश कराया जाता है। इस अनोखी परंपरा को देखने दूसरे गांव से भी लोग भारी संख्या में पहुंचते हैं।
गंधेल परिवार का मानना है कि इस परंपरा को नहीं मनाने पर उनके घर के देवी देवता नाराज हो जायेंगे और परिवार में कुछ अनिष्ठ हो सकता है। इस लिहाज से उनका पूरा परिवार यह परंपरा निभाते आ रहा है और आगे भी निभाते रहेंगे।
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