बाड़ी में औषधीय पौधों की खेती बनेगी अतिरिक्त आय का स्थायी साधन

बाड़ी में औषधीय पौधों की खेती बनेगी अतिरिक्त आय का स्थायी साधन

’धमतरी से पायलट प्रोजेक्ट : सिंदूरी और सतावर से हर साल 30 हजार तक की आय’

धमतरी। औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए आय का एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है, जिससे स्थायी रोजगार और पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा मिल सकता है। अश्वगंधा, तुलसी, आंवला, सिंदूरी, सतावर और एलोवेरा जैसे पौधों की बढ़ती मांग के कारण, यह क्षेत्र न केवल स्वास्थ्य को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि 2026 तक ग्रामीण विकास के नए अवसर भी खोल रहा है।

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। बोर्ड की नई योजना “घरों की बाड़ी से औषधीय पौधों का रोपण” के जरिए अब महिलाएं घर बैठे ही आय अर्जित कर सकेंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके घर के आंगन (बाड़ी) में ही नियमित रोजगार उपलब्ध कराना है।

सिंदूरी और सतावर की खेती वर्तमान में मांग-आधारित और अत्यधिक लाभदायक विकल्प हैं, क्योंकि इनकी उपयोगिता आयुर्वेद और प्राकृतिक रंगों के उद्योग में बहुत अधिक है। योजना के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं को बाजार में उच्च मांग वाले दो प्रमुख औषधीय पौधेकृसिंदूरी और सतावर निःशुल्क प्रदान किए जा रहे हैं। सिंदूरी के बीजों का उपयोग मुख्य रूप से खाद्य प्रसंस्करण, सौंदर्य प्रसाधन और आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। सतावर का पौधा शारीरिक दुर्बलता, दुग्धवर्धन और मानसिक तनाव दूर करने वाली दवाओं के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्थायी स्वरूप है। सिंदूरी से 12 माह और सतावर से 16 माह के भीतर उत्पादन मिलना शुरू हो जाता है। प्रत्येक महिला को प्रतिवर्ष 20 हजार से 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय होगी। एक बार रोपण के बाद यह आय का स्रोत आगामी 20 वर्षों तक दीर्घकालिक लाभ बना रह सकता है।

योजना की शुरुआत धमतरी जिले से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई है। जिले के 27 गांवों की 509 महिलाओं ने अपनी बाड़ी में लगभग 82 हजार सतावर और 39 हजार सिंदूरी के पौधों का रोपण किया है। उम्मीद है कि जनवरी 2027 से इन महिलाओं को पहली फसल से आय प्राप्त होने लगेगी।

बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने इस योजना को ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक रोल मॉडल बताया है। वहीं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने कहा ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के कारण अक्सर बाहर काम करने नहीं जा पातीं। यह योजना उन्हें उनके घर की दहलीज पर ही सम्मानजनक रोजगार और आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी।

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