सोमनाथ स्वाभिमान : विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव की विशेष पूजा
जशपुर। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड स्थित मयाली नेचर कैम्प में विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में प्रसिद्ध मधेश्वर महादेव पर्वत की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। जनप्रतिनिधियों और ग्रामवासियों ने बड़ी श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में भाग लिया तथा मयाली डेम खंडसा से वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़े।

मयाली गांव में विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग मौजूद है, जिसे ‘मधेश्वर महादेव’ के नाम से जाना जाता है। चरईडांड-बतौली स्टेट हाईवे पर स्थित यह शिवलिंगनुमा विशाल पर्वत सावन मास में श्रद्धालुओं के आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. सैकड़ों वर्षों से लोग इस पर्वत को शिवलिंग के रूप में पूजते आ रहे हैं।

मधेश्वर पर्वत के नीचे स्थित प्राचीन गुफा में सैकड़ों साल पुराना मंदिर है, जहां स्वयंभू शिवलिंग रूप में भगवान शिव विराजमान हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। विशेष रूप से बीमारियों से परेशान लोग इस पवित्र स्थान पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां दर्शन मात्र से मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं। सावन में यहां सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं।
मधेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना 1924 में हुई थी और वर्तमान में यहां पुजारियों की चौथी पीढ़ी पूजा-अर्चना कर रही है। पहले यहां प्रदेश के ही श्रद्धालु पहुंचते थे, लेकिन जब से इसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग का दर्जा मिला है, तब से इसकी ख्याति देशभर में फैल गई है। सावन के पावन अवसर पर यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
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