सोशल मीडिया का उजला पहलू, 20 साल बाद हुआ पिता-पुत्र का मिलन
छपरा । 1970 और 80 के दशक में बच्चों का अपने माता पिता से बिछड़ना और फिर जादूई संयोग से सही वक्त पर पर फिर मिल जाना एक आम बात थी। बच्चे किसी संकट के दौरान बिछड़ते और फिर पुलिस अफसर या डाकू बनकर लौटते। पर ऐसा हकीकत में भी होता है। कम से कम छपरा जिले के मांझी कस्बे में तो ऐसा ही हुआ। इस पुनर्मिलन में सोशल मीडिया ने भी बड़ी भूमिका निभाई।
नवभारत टाइम्स के अनुसार मांझी के मुंद्रिका यादव के लिए मंगलवार का दिन जीवन का खुशियों से भरा सबसे बड़ा दिन साबित हुआ। उन्होंने मोबाइल फोन से किए गए वीडियो कॉल में अपने उस तीसरे बेटे को देखा जो 20 साल पहले लापता हो गया था। उन्होंने बेटे से ही बातचीत नहीं की, बल्कि उसके साथ अपनी बहू और पोती को भी देखा और उनसे भी बात की। वे बेटे, बहू और पोती को मोबाइल स्क्रीन पर देखकर रो पड़े।
मांझी नगर पंचायत क्षेत्र के दक्षिण टोला में रहने वाले मुंद्रिका यादव के छह बेटे हैं। लेकिन उनका तीसरा बेटा करीब बीस साल पहले तब लापता हो गया था जब वह सात साल का था। मुंद्रिका यादव और उनके परिवार ने उसे तलाशने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। धीरे-धीरे दो दशक बीत गए और इसके साथ मांझी की उम्मीदें भी खत्म हो गईं।
मुंबई के उद्योगपति द्रुपचंद परमेश्वर साहनी को करीब 10 साल पहले दिल्ली में एक युवक लावारिस भटकता हुआ मिला। उत्तर प्रदेश के मऊ के मूल निवासी साहनी उसको अपने साथ मुंबई ले गए। उन्होंने युवक को अपनी फैक्ट्री में रोजगार दे दिया। लावारिस घूम रहा युवक नौकरीपेशा हो गया।
कहानी तीन साल पहले और आगे बढ़ी। सन 2023 में द्रुपचंद परमेश्वर साहनी ने उसकी शादी अपनी बहन से कर दी। कुछ समय बाद युवक की एक बेटी ने जन्म ले लिया। बचपन में परिवार से बिछड़े युवक के मन में भी यादों ने दस्तक दी। उसे अपने गांव, परिवार और दोस्तों की धुंधली स्मृतियां सालने लगीं। उसे मांझी कस्बे का रेलवे ब्रिज, गांव का मंदिर और कथावाचक बिनोद पाठक याद आए। जब उसने यह बात द्रुपचंद साहनी को बताई तो उन्होंने गूगल और सोशल मीडिया की मदद ली। उन्होंने गूगल के माध्यम से मुंद्रिका मांझी को तलाशा।
उन्होंने फेसबुक के जरिए मांझी में एक मैरिज हॉल चलाने वाले बिबेक कुमार सिंह से संपर्क किया। सिंह ने उनकी मदद की और युवक के परिवार को ढूंढ लिया। जब युवक के परिवार को इसकी सूचना दी गई तो उसके सभी परिजन बिबेक सिंह के पास पहुंचे। वहां सिंह ने मोबाइल से वीडियो कॉल करके मुंद्रिका मांझी से उनके बिछड़े हुए बेटे की बात कराई।
मुंद्रिका यादव ने जब मोबाइल पर अपने बेटे को देखा तो उनके आंसू बह निकले। उनका गला रुंध गया और वे भरी हुई आंखों के साथ नि:शब्द हो गए। उन्होंने ईश्वर का आभार जताते हुए इसे उन्हीं ती महिमा बताया। जिस बेटे की आस वे खो चुके थे वह 20 साल बाद उनकी आंखों के सामने था। उसका परिवार भी बस चुका है।
दूसरी तरफ मोबाइल पर अपने पिता को देखकर पुत्र भी अपने आंसू नहीं रोक सका। उसने मुंद्रिका यादव से कहा कि वह दो मई को अपनी पत्नी और बेटी के साथ मांझी पहुंचेगा। खेती करने वाले मुंद्रिका यादव दो दशक बाद अपे तीसरे पुत्र को सुरक्षित पाकर खुश हैं।
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