तालाबों की नगरी धमधा पहुंची इंटैक की टीम; देखी विरासत
दुर्ग/धमधा। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट की टोली रविवार को धमधा धर्मधाम गौरव गाथा समिति द्वारा आयोजित पुरखौती विरासत भ्रमण में शामिल हुई। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो एसके पाण्डे, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एसके पाटिल एवं पूर्व सदस्य सचिव राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्रो. डीएन शर्मा के नेतृत्व में यह भ्रमण कार्यक्रम संपन्न हुआ। धमधा में यह आयोजन धर्मधाम गौरव गाधा समिति के संयोजक गोविन्द पटेल के सौजन्य से सम्पन्न हुआ।

गोविन्द पटेल ने बताया कि धमधा एक प्राचीन नगरी है जहां इतिहास के कई साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। राजा सांड विजय ने इस नगरी को बसाया। सुरक्षा के लिए यहां राजमहल (अब खंडहर) के चारों तरफ चक्रवार तालाबों की खुदाई की गई थी। इन तालाबों के कारण धमधा को छह आगर छह कोरी (126) तालाबों के नाम से प्रसिद्धि मिली। पर आज इनमें से बमुश्किल दो दर्जन तालाब ही शेष हैं। गौरव गाथा समिति तालाबों के पुनरुद्धार में जुटी है। पिछले कुछ वर्षों में समिति के सदस्यों ने श्रम एवं अंशदान से छह तालाबों का जीर्णोद्धार किया है।

पटेल ने कहा कि तालाबों की नगरी होने के बावजूद इसे विडम्बना ही कहा जाएगा कि नगर अब गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहा है। ग्रीष्म में संकट और भी बढ़ जाता है। शासन यदि तालाबों का चिन्हांकन और सीमांकन कर दे तो समिति उन तालाबों का भी उद्धार करेगी जो कब्जों से पट गए हैं।

भ्रमण के बाद आयोजित संगोष्ठी में दोनों पूर्व कुलपतियों ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अपने सुझाव दिये। प्रो. पाटिल ने कहा कि आपसी सहयोग से यहां के युवाओं ने जो किया वह सराहनीय है। पर यदि बड़े पैमाने पर इस कार्य को करना है तो इसके लिए वैज्ञानिक ढंग से प्रस्ताव तैयार करना होगा। इसमें आने वाले पांच साल की कार्ययोजना तैयार करनी होगी तथा एक प्राक्कलन तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्य में वे अपना सहयोग देने को तैयार हैं। उन्होंने अपना विद्यार्थी जीवन इसी गांव में बिताया था।

प्रो. पाण्डेय ने गोविन्द पटेल एवं उनके साथियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि हमें विरासत में बहुत कुछ मिला। हमें इस पर चिंतन और काम करने की जरूरत है कि हम आने वाली पीढिय़ों के लिए कैसी विरासत छोड़ कर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में उन्होंने तालाबों और कुओं का पानी भी बिना किसी संकोच के पिया है। आज बोतल बंद पानी पीने में भी डर लगता है। इस स्थिति को बदलने की जरूरत है।
प्रो. डीएन शर्मा एवं वरिष्ठ साहित्यकार रवि श्रीवास्तव एवं विद्या गुप्ता तथा रमेश पटेल ने भी संबोधित किया। भ्रमण दल में शानू मोहनन, स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्य एवं इंटैक दुर्ग-भिलाई की संयोजक डॉ हंसा शुक्ला, फोटोग्राफर कांति भाई सोलंकी, डॉ प्रज्ञा सिंह, महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ संध्या मदन मोहन, कमलेश चंद्राकर, चित्रकार डॉ महेश चतुर्वेदी, दीपक रंजन दास, डॉ अलका दास. जगमोहन सिन्हा, आदि सम्मिलित हुए।
भ्रमण के दौरान दल ने पंडितवा तालाब, कबीर मठ, दानी तालाब ताम्रपत्र, चरगोडिय़ा मंदिर,, टार तालाब, प्राचीन वृद्धेश्वर शिवलिंग, भानपुर, महामाया मंदिर, बूढ़ादेव, राजा किला, राज्य संरक्षित स्मारक चौखडिय़ा तालाब, शीतला मंदिर, अशोक कसार का कांसा उद्योग, रामलीला चौक, विष्णु प्रसाद ताम्रकार की अनूठी मूर्तिकला, पठऊवा शैली में निर्मित विमलचंद ताम्रकार का सौ साल पुराना घर भी देखा।
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