खपरी की यामिनी ने स्कूटी चलाने की ट्रेनिंग को बनाया आजीविका का साधन
धमतरी। शहरी बच्चों की ड्राइविंग और ट्रैफिक सेंस यातायात के लिए अच्छा खासा सिरदर्द साबित हो रहा है। ऐसे में जब गांव-गांव में दुपहिया चालन की ट्रेनिंग की बात आती है तो सुखद आश्चर्य होता है। ग्राम खपरी की निवासी यामिनी साहू ठीक यही कर रही हैं। दुपहिया चालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने इसी को आजीविका का साधन बनाया और आज बच्चों को सही ढंग से गाड़ी चलाने का प्रशिक्षण दे रही हैं।
यामिनी अपने क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर आत्मनिर्भरता की नई पहचान स्थापित की है। जिला प्रशासन एवं ‘प्रथम’ संस्था के संयुक्त सहयोग से आयोजित स्कूटी प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेकर यामिनी ने सफलतापूर्वक ड्राइविंग कौशल सीखा। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने न केवल स्कूटी चलाना सीखा, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी विकास किया।
प्रशिक्षण को यामिनी ने स्वयं तक सीमित नहीं रखा बल्कि आस पास की ग्रामीण महिलाओं को स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण दे भी रही हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाएं अब घर की सीमाओं से बाहर निकलकर आत्मविश्वास के साथ नए अवसरों की ओर बढ़ रही हैं।
पिछले महीने मार्च में यामिनी ने ₹32,000 में सेकंड हैंड होंडा ग्राज़िया स्कूटी खरीदकर अपने सपनों को और मजबूती दी। इस स्कूटी के माध्यम से वे प्रशिक्षण कार्य संचालित कर रही हैं, साथ ही इसे आय के एक स्थायी साधन के रूप में विकसित कर रही हैं। उनके इस नवाचार ने उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाया है और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है।
यामिनी साहू की यह पहल न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह सामुदायिक परिवर्तन का एक सशक्त उदाहरण भी है। उनके प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और जागरूकता का विस्तार हो रहा है। जिला प्रशासन की ऐसी योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज के अंतिम छोर तक पहुंचकर सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। यामिनी जैसी महिलाएं इन योजनाओं की वास्तविक सफलता को दर्शाती हैं, जो अपने प्रयासों से न केवल स्वयं आगे बढ़ रही हैं, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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