14वीं सदी कल्चुरीकाल में बना था राजिम का भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर

14वीं सदी कल्चुरीकाल में बना था राजिम का भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर

राजिम। राजिम को शिवालयों की नगरी भी कहा जाता है। यहां संगम तट पर स्थित कुलेश्वरनाथ, राजराजेश्वर, दानेश्वर, पंचेश्वरनाथ, गरीबनाथ, सोमेश्वरनाथ, बटुकेश्वरनाथ और भुवनेश्वरनाथ जैसे अनेक प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। हरी और हर की इस पावन नगरी में शिव भक्ति की धारा निरंतर बह रही है।14वीं सदी कल्चुरीकाल में बना था राजिम का भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर
श्री राजीव लोचन मंदिर के सामने  भूतेश्वरनाथ महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग को राजिम का सबसे ऊंचा शिवलिंग माना जाता है, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
भूतेश्वर नाथ महादेव मंदिर को कलचुरी काल का प्राचीन मंदिर माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण लगभग 14 वीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर ईंट और पत्थरों से बना है और इसकी बनावट चौकोर आकार में है। मंदिर की मजबूत नींव और सुंदर शिल्पकारी लोगों को आकर्षित करती है।
मंदिर के अंदर तीन मुख्य भाग हैं महामंडप, अंतराल और गर्भगृह। महामंडप में छह पत्थर के स्तंभ हैं, जो नीचे चौकोर और ऊपर गोल आकार में बने हैं। मंदिर पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए है। गर्भगृह में काले पत्थर से बना भूतेश्वर नाथ महादेव का शिवलिंग स्थापित है, जिसकी ऊंचाई तीन फीट से अधिक है। इसलिए इसे राजिम का सबसे ऊंचा शिवलिंग कहा जाता है। मंदिर की दीवारों पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित अन्य देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं। दक्षिण दिशा में गंगा मैया और उत्तर दिशा में मां दुर्गा की प्रतिमाएं अंकित हैं। मान्यता है कि भूतेश्वर नाथ महादेव की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और आत्मिक शांति मिलती है। कुंभ कल्प मेले के दौरान भगवान कुलेश्वर महादेव, भगवान राजीवलोचन के साथ-साथ यहां भी श्रद्धालु दर्शन लाभ ले रहे है।

#BhooteshwarMahadevRajim

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *