एक साल के बच्चे की नाक हो गई बंद, हाईटेक में जटिल ईएनटी सर्जरी
भिलाई। हाईटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल में एक मासूम बच्चे की जटिल सर्जरी की गई। बच्चे की नाक का एक छिद्र जन्म के समय से ही बंद था। इसमें मांस का एक पिण्ड था। पिंड बढ़ता ही चला गया और फिर बच्चे के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया। बच्चे की कम उम्र और सर्जरी के बाद अंतःस्राव के खतरे को देखते हुए उसे अधिकांश अस्पतालों ने लौटा दिया था। तब जाकर बच्चा यहां पहुंचा।

ईएनटी सर्जन डॉ अपूर्व वर्मा ने बताया कि यह एक जटिल सर्जरी इसलिए थी कि सर्जरी के बाद 48 घंटे तक नाक को पूरी तरह से बंद रखना था। इस बीच सांस लेने की वैकल्पिक व्यवस्था करनी थी। बच्चे की उम्र केवल एक साल थी इसलिए उसे एनेस्थीसिया देना भी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में हाईटेक के विशेषज्ञों की टीम काम आई. एनेस्थेटिस्ट डॉ नरेश देशमुख, इंटेंसिविस्ट डॉ नीलिमा बम्बोडे तथा डॉ मौसम खुबवानी के साथ इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी की तैयारी की गई।
सर्जरी में विशेष सावधानी रखी गई कि पोस्टऑप कॉम्प्लीकेशन न हो। नाक को पूरी तरह सील कर दिया गया। मुंह से ही एक पतली नली ऑक्सीजन के लिए एयरवे तक सरका दी गई। इसके बाद बच्चा मुंह से ही आहार लेता रहा। सर्जरी के 48 घंटे बाद नाक खोल दी गई। ऑक्सीजन के लिए लगा पाइप हटा दिया गया। बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और डिस्चार्ज के लिए तैयार है।
डॉ अपूर्व ने बताया कि यह एक हाईरिस्क सर्जरी थी। इतने छोटे बच्चे को एनेस्थीसिया देना अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। बच्चे का वायुमार्ग (Airway) अवरुद्ध था। रक्तस्राव का खतरा था जो भीतर की तरफ जा सकता था। खून का थक्का जमने की प्रक्रिया गड़बड़ थी (deranged coagulation profile)। सर्जरी के बाद नाक को पैक करना भी चुनौतीपूर्ण था।
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