दुर्ग साइंस कालेज में दीक्षारंभ समारोह, दी राष्ट्रीय शिक्षा नीति की जानकारी
दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में आज स्नातक स्तर के प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेषित विद्यार्थियों को महाविद्यालय में उपलब्ध संसाधनों तथा राष्ट्रीय षिक्षा नीति 2020 एवं स्वशासी परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने हेतु दीक्षारंभ समारोह आयोजित किया गया।
महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डाॅ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि दीक्षारंभ समारोह में लगभग 400 से अधिक स्नातक प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी तथा प्राध्यापकगण उपस्थित थे। स्वशासी प्रकोष्ठ की नियंत्रक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा तथा आईक्यूएसी समन्वयक डाॅ. प्रज्ञा कुलकर्णी के संयोजकत्व में आयोजित इस दीक्षारंभ समारोह में शासकीय नवीन संगीत महाविद्यालय दुर्ग की नव प्रवेशित छात्र-छात्राएं भी उपस्थित थीं।
सरस्वती पूजन, वंदे मातरम तथा छत्तीसगढ़ी राज्य गीत अरपा पैरी की धार की प्रस्तुति के साथ आरंभ हुए दीक्षारंभ समारोह का सफल संचालन डाॅ. ज्योति धारकर ने किया। अतिथियों का स्वागत करने वालों में प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार सिंह, वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा, इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. अनिल कुमार पाण्डेय, डाॅ. प्रज्ञा कुलकर्णी, डाॅ. सुनीता मैथ्यू, डाॅ. संजू सिन्हा शामिल थी। साईंस कालेज, दुर्ग के आईक्यूएसी सेल तथा एनईपी सेल द्वारा शासकीय नवीन संगीत महाविद्यालय, दुर्ग क साथ मिलकर आयोजित इस दीक्षारंभ समारोह में एनईपी एम्बसेडर केन्द्रिका साहू, षिवानी साहू, भूपेन्द्र कुमार, तोषी निर्मलकर, निधि लोहार, रूपेन्द्र गिर, गरिमा सबलेख, ओंकार सोनी, अंषु गुप्ता, निखिल साहू तथा संगीत महाविद्यालय, दुर्ग की प्रभात राॅय एवं मुस्कार बंजारे का बैज लगाकर सम्मान किया गया। समारोह की मुख्य अतिथि उच्चषिक्षा दुर्ग संभाग की अपर संचालक डाॅ. अनुपमा अस्थाना ने अपने संबोधन में कहा कि आज सम्मानित होने वाले एनईपी एम्बेसेडर का दायित्व और बढ़ गया है। डाॅ. अस्थाना ने दीक्षारंभ को एक नई शुरूआत बताते हुए कहा कि विद्यार्थी की पहचान केवल अंकों से नही बल्कि महाविद्यालय में उसकी रचनात्मक भूमिका से होती है। डाॅ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के संदेष सपने वह देखें जो हमें सोने नही दें का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि हर चुनौती का सामना करें घबरायें नही। राष्ट्रीय षिक्षा नीति 2020 पर केन्द्रित महत्वपूर्ण जानकारी आईक्यूएसी सेल प्रभारी डाॅ. प्रज्ञा कुलकर्णी ने दी तथा स्वषासी परीक्षा प्रणाली से संबंधित आवष्यक जानकारी स्वषासी प्रकोष्ठ की नियंत्रक डाॅ. जगजीत कौर सलूजा ने विद्यार्थी को दी।
विषिष्ट अतिथि के रूप में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए महाविद्यालय जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री षिवेन्द्र सिंह परिहार ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि महाविद्यालय में विद्यार्थी को स्व-नियंत्रण रखना चाहिए। महाविद्यालयीन जीवन से ही विद्यार्थी के भविष्य की दिषा एवं दषा तय होती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी को अपने उन्नति के अवसर पहचानना चाहिए। शासकीय संगीत महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. ऋचा ठाकुर ने अपने में नैतिक एवं चारित्रिक मूल्यों के साथ महाविद्यालय में अध्ययन करने का उपस्थित विद्यार्थियों से आग्रह किया। डाॅ. ठाकुर ने कहा कि संगीत का भारतीय ज्ञान परंपरा से गहरा संबंध रहा है। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. अजय कुमार सिंह ने विषय परावर्तन करते हुए कहा कि दीक्षारंभ समारोह विद्यार्थियों के जीवन में नवाचार षिक्षा, अनुसंधान व जीवन जीने की कला सीखने का आरंभ है। डाॅ. सिंह ने कहा रामायण एवं महाभारत मानव जीवन के शाष्वत विष्वविद्यालय है। अर्जुन की दुविधा वर्तमान विद्यार्थियों की भी दुविधा है। डाॅ. सिंह ने महाविद्यालय को विचारों की वाटिका निरूपित किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आग्रह किया कि सदैव जिज्ञासु बने।कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. प्रषांत कुमार श्रीवास्तव ने किया।
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