स्लीप पैरालिसिस, जब हिलना डुलना या चीखना भी हो जाता है मुश्किल
नींद में एक ऐसी अवस्था भी आती है जब आप डरावनी चीजों का अनुभव करते हैं। आप भागना चाहते हैं पर पैर नहीं उठते, आप चीखना चाहते हैं पर आवाज नहीं निकलती, आपके हाथ भी आपका निर्देश मानने से इंकार कर देते हैं। इस अवस्था को स्लीप पैरालिसिस कहते हैं। संभवतः इसी तरह की अनुभूतियों से भूत-प्रेत और पिशाचों का जन्म हुआ। ऐसी ही अवस्था में लोग भगवान के दर्शन करते हैं या फिर प्रेतलोक का वितरण कर आते हैं। (Pic Credit The Guardian)
स्लीप पैरालिसिस के दौरान कुछ लोगों को लगता है कि उन्होंने किसी दानव, भूत-प्रेत, एलियंस या फिर अपने मरे हुए रिश्तेदारों को देखा है। कुछ लोग अपने ही शरीर के कुछ हिस्सों को हवा में तैरते हुए देखते हैं और कुछ को तो लगता है कि उनका ही हमशक्ल उनके बगल में खड़ा है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इन्हीं अनुभूतियों के कारण के शुरुआती दिनों में चुड़ैलों के होने जैसे अंधविश्वास को बढ़ावा मिला। 19वीं सदी की ब्रितानी लेखिका मैरी शेली ने अपने मशहूर उपन्यास फ़्रैंकनस्टाइन में भी स्लीप पैरालिसिस का ज़िक्र किया है। लेकिन हाल तक इस पर बहुत कम शोध हुए हैं।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंसानों की नींद पर शोध कर रहे बालंद जलाल का कहना है कि पिछले दस सालों में इस विषय में लोगों की रुचि बढ़ी है। जलाल ने 2020 में स्लीप पैरालिसिस के इलाज के लिए विभिन्न तरीक़ों का पहले क्लिनिकल ट्रायल पूरा किया है।
सेंट मैरी कॉलेज ऑफ़ मैरीलैंड में विज़िटिंग एसोसिएट प्रोफ़ेसर और क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक ब्रायन शार्पलेस ने साल 2011 में पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में रहते हुए इस मामले में अब तक का सबसे गहन अध्ययन किया। उन्होंने पांच दशकों के दौरान 35 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिसमें क़रीब 36 हज़ार से अधिक वॉलेंटियर्स शामिल थे।
शार्पलेस ने पाया कि स्लीप पैरालिसिस पहले की तुलना में अब ज़्यादा कॉमन है। उनके अनुसार क़रीब आठ फ़ीसद व्यस्कों ने कम से कम एक बार इस तरह का अनुभव किया है। उन्होंने इस पर एक किताब भी लिखी है जिसका नाम है ‘स्लीप पैरालिसिस: हिस्टॉरिकल, साइकोलॉजिकल एंड मेडिकल पर्सपेक्टिव’।
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