जिद्दी बेटे को बाइक दिलाना भारी पड़ा, हादसे में गई जान

जिद्दी बेटे को बाइक दिलाना भारी पड़ा, हादसे में गई जान

लखनऊ। बच्चों की जिद के आगे माता-पिता को झुकना ही पड़ता है। देश का माहौल ही कुछ ही कुछ ऐसा हो गया है कि हर कोई अपने शौक पूरी करने में लगा है। सुरक्षा के प्राथमिक उपाय करना भी उन्हें जरूरी नहीं लगता। साल 2011 में जब क्रिकेटर अजहरुद्दीन के बेटे की जान एक सड़क हादसे में चली गई थी तब इसपर एक सतही बहस जरूर हुई थी पर देश की मानसिकता में कोई खास बदवाल नहीं आया। एक ऐसे ही पिता ने अपने बेटे की जिद के आगे घुटने टेकते हुए उसे पौने चार लाख की बाइक दिला दी पर हेलमेट पहनने के लिए मजबूर नहीं कर पाया। एक हादसे ने उनसे उनका बेटा ही छीन लिया।

यूपीसीएल में तैनात एसडीओ इकबाल ने अपने इकलौते नाबालिग बेटे नैतिक कुमार की जिद के आगे झुकते हुए करीब पौने चार लाख रुपये की बुलेट जीटी बाइक दिलाई थी। लेकिन यही बाइक परिवार के लिए काल बन गई।
पुलिस के अनुसार, 17 वर्षीय नैतिक रविवार सुबह बाइक लेकर जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचा था। वहां कुछ लोग स्टंट की वीडियो बना रहे थे। नैतिक के मन में भी स्टंट करने का विचार आया। उसने बाइक की रफ्तार बढ़ा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाइक की गति करीब 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। तेज रफ्तार के कारण नियंत्रण बिगड़ गया और सामने से आ रही एक स्कूटी से जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि नैतिक कई फीट दूर जाकर सड़क पर गिरा और घिसटता चला गया। बाइक के परखच्चे उड़ गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। घायल को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि किशोर बिना हेलमेट के बाइक चला रहा था। तेज रफ्तार और स्टंटबाजी इस हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। हादसे के बाद से परिवार गहरे सदमे में है। जिस बेटे की हर जिद पूरी करना पिता को खुशी देता था, वही जिद अब जिंदगीभर का पछतावा बन गई है।

इसलिए महत्वपूर्ण है मामला

यह मामला मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई अभिभावक नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति देता है, तो उसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। ऐसे मामलों में वाहन का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष के लिए निरस्त किया जा सकता है, ₹25000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, गंभीर मामलों में कारावास का प्रावधान, नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल सकता।
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