बांधवगढ़ के हाथियों ने चुरहट में डाला डेरा, रेडियो कॉलर ने बताया
रीवा। गले में रेडियो कॉलर लगाए दो जंगली हाथी बांधवगढ़ नेशनल पार्क के इलाके से लगभग 250-300 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद, असामान्य रूप से भटककर रीवा वन सर्कल में दाखिल हो गए। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ से पूर्वी मध्य प्रदेश में आने वाले हाथियों के सामान्य रास्तों से हटकर एक अलग रास्ता अपनाया। वन अधिकारियों ने बताया कि हाथियों का यह जोड़ा इस समय सीधी जिले की चुरहट रेंज में 10 किलोमीटर के दायरे में घूम रहा है, और उन पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
सतना, सीधी और मऊगंज डिवीजनों से हाथियों के गुजरने की दुर्लभ घटना ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। हालांकि अब तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। मुख्य वन संरक्षक (रीवा सर्कल) राजेश राय ने बताया कि ये दोनों हाथी लगभग 15 फरवरी को बांधवगढ़ के पास एक बांध पार करके इस सर्कल में दाखिल हुए थे। इसके बाद वे सतना और सीधी डिवीजनों से होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा के पास मऊगंज और हनुमाना की ओर बढ़ गए, जिससे यह आशंका बढ़ गई थी कि वे घनी आबादी वाले इलाकों में भटक सकते हैं।
आखिरकार वे वापस लौट आए और अब सीधी के चुरहट इलाके में हैं। इन दोनों हाथियों की पहचान बांधवगढ़ के हाथियों के समूह के हिस्से के तौर पर हुई है और वन विभाग की टीमें लगातार इन पर नजर रख रही हैं।
राजेश राय, मुख्य वन संरक्षक (रीवा सर्कल)
राय ने बताया कि पूर्वी मध्य प्रदेश में इस समय हाथियों के दो ऐसे समूह मौजूद हैं, जिन्होंने 2015-16 के आसपास छत्तीसगढ़ से राज्य में आना शुरू किया था। इनमें से एक बड़ा झुंड बांधवगढ़ के जंगलों में बस गया, जबकि लगभग 10-12 हाथियों का एक छोटा झुंड आमतौर पर संजय-डुबरी नेशनल पार्क में रहता है। हाथियों की इन इलाकों में मौजूदा आवाजाही को असामान्य माना जा रहा है, क्योंकि वे आमतौर पर अनूपपुर-शहडोल या सिंगरौली-सीधी के रास्तों से ही राज्य में प्रवेश करते हैं।
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