बाघिन का पंजा काटकर ले गए शिकारी, करंट लगाकर मार डाला

बाघिन का पंजा काटकर ले गए शिकारी, करंट लगाकर मार डाला

भोपाल। टाइगर स्टेट एमपी के जंगलों में बाघ सुरक्षित नहीं है? बीते डेढ़ साल से टाइगर रिजर्व और बाहरी इलाकों में बाघों की मौतों का आंकड़ा एकदम से बढ़ गया है। हर चौथे-पांचवे दिन प्रदेश में बाघ की मौत हो रही है। ताजा मामला सिवनी जिले में बाघिन को करंट लगाकर शिकार कर लिया गया। तस्करों ने उसके पीछे के पैर के पंजे काट लिए और सबूत छिपाने के लिए उसे एक कुएं में फेंक दिया।

जानकारी अनुसार प्रदेश के सिवनी जिले में सिवनी-छिंदवावड़ा राजमार्ग पर स्थित चरगांव में एक खेत में बने कुएं में बाघिन का शव मिला है। बाघिन की मौत करंट लगने से हुई है। खेत मालिक ने वन विभाग को सूचना दी थी, कि खेत के कुएं में एक बाघ गिर गया है। यह मामला सीधे तौर पर टाइगर के शिकार से जुड़ा है। कुएं के आसपास बिजली के वायरल के टुकड़े, जले हुए तार के हिस्से सहित तमाम सबूत मिले हैं।
एनटीसीए के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में साल 2026 में 1 जनवरी से 27 अप्रैल तक 117 दिन में 27 बाघों की जान जा चुकी है। इसमें नर-मादा सहित बाघ शावक भी शामिल हैं। बाघ न जंगल में सुरक्षित हैं, न जंगल के बाहरी इलाके में सुरक्षित हैं। शिकार, कटीले तार, करंट वाले तार, तस्करी सहित अब तो भूख से बाघों के मरने के मामले सामने आने लगे हैं।

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