ऑस्टियोनेक्रोसिस : जब लेटना भी हुआ मुश्किल तो हाईटेक पहुंचा मरीज

ऑस्टियोनेक्रोसिस : जब लेटना भी हुआ मुश्किल तो हाईटेक पहुंचा मरीज

भिताई। 42 वर्षीय एक पुलिस कर्मी करीब 2 साल पहले घायल हो गया था। कूल्हे में दर्द रहने लगा था। चलने फिरने में भी तकलीफ हो रही थी। धीरे-धीरे तकलीफ बढ़ती चली गई। उठना-बैठना तो दूर, लेटे रहने में भी तकलीफ होने लगी। तब जाकर वह हाईटेक सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल पहुंचा।
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ दीपक सिन्हा ने बताया कि जांच करने पर पता चला कि मरीज का दाहिनी तरफ का कूल्हे का जोड़ लगभग नष्ट हो चुका था। ऐसी स्थिति तब भी बनती है जब मरीज को सिकल सेल एनीमिया (सिकलिंग) की शिकायत हो।
सिकल के आकार की रक्त कोशिकाएं छोटी रक्त वाहिकाओं को ब्लॉक कर देती हैं, जिससे हड्डियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसे ऑस्टियोनेक्रोसिस (Avascular Necrosis) कहते हैं। इससे हड्डियों के ऊतक (मरने लगते हैं, विशेषकर कूल्हे (Hip joint) और जांघ की हड्डी में। जांच करने पर मरीज में सिकल सेल ट्रेट की पुष्टि हो गई।
इसके बाद मरीज और परिजनों की काउंसलिंग की गई। कूल्हे के खराब जोड़ को बदलना ही इस तकलीफ को खत्म कर सकता था। सहमति मिलने के बाद मरीज की टोटल हिप रीप्लेसमेंट सर्जरी कर दी गई। ऑपरेशन के दूसरे ही दिन दर्द जाता रहा। दो दिन बाद मरीज क्रच की सहायता से चलने फिरने लगा। चौथे दिन वह बिना किसी सहारे के उठने और चलने में समर्थ हो गया। एक सप्ताह बाद उसे छुट्टी दे दी गई।
डॉ दीपक सिन्हा ने बताया कि ऐसे मामलों जब जोड़ पूरी तरह से जवाब देने लगें तब दर्द निवारक औषधियों पर भरोसा करने की बजाय जोड़ प्रत्यारोपण का विकल्प चुनना बेहतर होता है। न केवल तकलीफ से स्थाई आराम मिल जाता है बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है।

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