नई दिल्ली। भारत के तेरहवें राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने वह कर दिखाया जो उनसे पहले किसी ने नहीं किया था। उन्होंने राष्ट्रपति भवन की देखभाल निजी संपत्ति की भांति की। अनुपयोगी पड़े कमरों में धूल खा रही कीमती धरोहरों को एकत्र कर संग्राहलय बनाया। राष्ट्रपति भवन के खास मेहमानों की पूरी सूची तैयार कर उसपर ग्रंथ तैयार करवाया। राष्ट्रपति भवन तथा उसके पूरे परिसर की मरम्मत करवाई। उस इमारत को पुस्तकालय में तब्दील कर दिया जिसे गिराए जाने की तैयारी थी।












