बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की सरगर्मियों के बीच बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) की एक छात्रा के साथ छेडख़ानी होती है। छात्रा वार्डन से शिकायत करती है। वार्डन उलटे उसी को धमकाने लगता है। मामला विश्वविद्यालय के कुलपति के पास ले जाने की कोशिश होती है तो वे समय ही नहीं देते। अब छात्र समुदाय मामले को सड़क पर लेकर आता है तो उनपर पुलिस छोड़ दी जाती है। वही पुलिस जिनपर छात्राओं की एक रिपोर्ट पर छेडख़ानों की क्लास लगाने की जिम्मेदारी है। प्रशासनिक हेकड़ी का इससे बेहतर उदारण और क्या हो सकता है।












