acharya shri vidyasagar ji maharsj

आचार्यश्री ने कहा कि हम यदि केवल अपना लाभ देखकर काम करते हैं तो इससे कषाय की वृद्धि होती है। पर यही काम यदि हम परमार्थ को उद्देश्य बनाकर करते हैं तो साथ में स्वहित भी अपने आप सध जाता है। इसके साथ ही चूंकि भाव में परोपकार है, परहित है इसलिए कषाय धुलते चले जाते हैं। इसलिए स्वहित के कार्यों के लिए भी परहित को निमित्त करें।

आचार्यश्री ने कहा कि हम यदि केवल अपना लाभ देखकर काम करते हैं तो इससे कषाय की वृद्धि होती है। पर यही काम यदि हम परमार्थ को उद्देश्य बनाकर करते हैं तो साथ में स्वहित भी अपने आप सध जाता है। इसके साथ ही चूंकि भाव में परोपकार है, परहित है इसलिए कषाय धुलते चले जाते हैं। इसलिए स्वहित के कार्यों के लिए भी परहित को निमित्त करें।

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