भिलाई। टीचर एजुकेशन करिकुलम में लगातार हो रहे बदलाव, टीचर ट्रेनिंग के लिए आ रही युवा पीढ़ी, टीचिंग मेथड्स का बासीपन, सब मिलकर प्रायमरी एजुकेशन की रीढ़ तोड़ रही है। ज्ञान किताबी हो गई है इसलिए अच्छे एजुकेशनिस्ट तो हो रहे हैं पर रिसर्च को खास गति नहीं मिल रही। एक दिशाहीनता का अहसास होता है। यह कहना है पं. सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बंशगोपाल सिंह का। डॉ बंशगोपाल सिंह यहां जी.डी. रूंगटा कॉलेज आॅफ साइंस एण्ड टेक्नालॉजी करिकुलम रिफॉर्म्स इन टीचर एजुकेशन: एनहेंसिंग केपेबिलिटीज एण्ड कॉम्पीटेन्सी विषय पर नैक द्वारा स्पॉन्सर्ड सेमीनार को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे।












