भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा।
भिलाई। एक तो मराठा, ऊपर से भारतीय सेना की तालीम। हार मानने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। जहां से औरों की खत्म होती है, वहां से शुरू होती है लक्ष्मीकांत शिर्के की नई जिन्दगी। 2011 में वे एक रेल हादसे का शिकार हुए तो एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा।