पटना। कुछ लोग, जिनमें बड़ी तादाद में शिक्षित लोग भी शामिल हैं का मानना है कि बिना दान दहेज के शादी हो ही नहीं सकती। दान का तो समझ में आता है। हमेशा के लिए किसी और घर, कुल, गोत्र में शामिल होने जा रही बेटी को कोई खाली हाथ नहीं भेजता पर तिलक पर दहेज की मांग अशोभनीय, पीड़ादायक और अपराध है। बिहार के लोगों ने अब खुद ही इसका हल ढूंढ लिया है। योग्य वर को अब पकड़ुआ विवाह का दंश झेलना पड़ रहा है। पिछले साल राज्य में करीब 3400 युवकों का ‘पकड़ुआ विवाह’ कराया गया।












