भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में कागज का प्रयोग कम करने हेतु विकल्प विषय पर परिचर्चा का आयोजन यूजीसी के निर्देशानुसार ग्रीन आॅडिट कॉमेटी द्वारा किया गया। साथ ही कागज निर्माण प्रक्रिया में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की भी चर्चा की गई। महाविद्यालय की ग्रीन आॅडिट कॉमेटी द्वारा संयोजक डॉ. शमा अफरोज बेग ने बताया कि पल्प और पेपर इंडस्ट्री पर्यावरण प्रदूषण में विश्व में तृतीय स्थान पर है। इसमें प्रयुक्त होने वाली क्लोरीन, पानी, वायु और मिट्टी को दूषित करता है तथा निकलने वाली मीथेन गैस-कार्बन डाईआॅक्साइड से 25 गुना अधिक हानिकारक/ विषैली है। उन्होंने बताया कि एक टन पेपर बनाने में हमें 7000 गैलन पानी, 17 पेड, 380 गैलन तेल और 4000 किलो वाट एनर्जी लगती है एक ए-4 पेपर के निर्माण में 5 लीटर पानी लगता है।












