भिलाई। मनुष्य मात्र का जीवन विचारों का ताना बाना है। जब भी हम अकेले होते हैं या बिस्तर में निंदिया रानी का इंतजार करते हैं तो विचारों के इस संसार में खलबली मची रहती है। इनमें से कुछ विषय अनमोल होते हैं। कुछ आगे की रणनीति तय करने में मददगार होते हैं। कुछ यूं ही आकर चले जाते हैं। इनमें से कुछ अनमोल होते हैं जिन्हें अकसर हम भुला देते हैं। अंशिका ने अपने काव्य संकलन में इन पलों को बड़ी शिद्दत से संजोया है।
अंशिका मदन मोहन पेशे से सिविल इंजीनियर हैं। एमबीए करने के बाद वे फार्चून-500 कंपनी अर्नस्ट एंड यंग से जुड़ गईं। महज 27 वर्ष की उम्र में वे इस फर्म के लिए आर्बिट्रेशन कंसलटेंट की जिम्मेदारी संभाल रही है। पर्यावरण को लेकर भी वे बेहद सजग हैं। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद उनकी रचनाधर्मिता उन्हें आज भी कलम उठाने के लिए मजबूर करती है।












