भिलाई। फौजी का जो अक्स हमारे जेहन में पैबस्त है, वह एक कड़क, मुस्तैद बावर्दी जवान का है. हमने उन्हें या तो खतरों को चुनौती देते देखा है, हंसते-हंसते वतन पर फिदा होते देखा है या फिर तिरंगे में लिपट कर घर लौटते. बंकर-खाई-खंदक-बीहड़ में मुस्कुराते ये चेहरे, पीछे छूट गए अपने गांव और परिवार से कैसे जुड़े रह पाते होंगे? साथी फौजियों से इनका लगाव कैसा होता होगा? विशिष्ट पराग की कहानियां बातों-बातों में फौजी जीवन के ऐसे अनेक अनछुए पहलुओं को स्पर्श करती है.












