चमड़े की जुबान है, कभी फिसल भी जाती है. पर इतनी सी बात को लेकर किसी व्यंक्ति की नीयत या काबिलियत पर शक नहीं करना चाहिए. जो लोग रोज पौना-पौना घंटा के कई लेक्चर देते हैं, उनकी भी कभी-कभार जुबान फिसल जाती है. कुछ लोग उसे तुरंत ठीक कर लेते हैं तो कुछ लोग टोके जाने पर माफी मांग लेते हैं. पर राजनीति के गलियारों में जब जुबान फिसलती है तो वह लोगों के मनोरंजन का साधन बन जाती है. पर फिसली हुई जुबान से किसी की काबिलियत पर कभी शक नहीं किया गया. इस परिपाटी का श्रीगणेश भाजपा ने किया. भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इसी के बलबूते “पप्पू” साबित कर दिया. पर ऐसा नहीं है कि जुबान केवल राहुल गांधी की फिसलती है. जुबान तो ठहराव के साथ बोलने वाले पीएम मोदी की भी फिसलती है. अमित शाह भी इसके अपवाद नहीं हैं.












