देश सिस्टम से चलता है. सिस्टम सर्टिफिकेट की बांदी है. इसलिए सारी काबीलियत एक तरफ और सर्टिफाइड प्रफेशनल एक तरफ. कभी सुअर की किडनी लगाकर मरीज को चंगा करने वाला डाक्टर गिरफ्तार हो जाता है, कभी सड़क हादसे में घायल दर्जनों लोगों के इलाज में सहभागिता के लिए कम्पाउंडर और ड्रेसर सस्पेंड हो जाते हैं. भिलाई की ही बात करें तो एक सर्टिफाइड न्यूरो सर्जन को केवल इसलिए शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया गया कि उसने इमरजेंसी में एनेस्थेटिस्ट का काम संभाल लिया था. बात यहां लोगों का जीवन बचाने की नहीं बल्कि सर्टिफिकेट और प्रोसीजर की है.












