शराब दुकान के बारे में यह कहा जाता है कि इसे जंगल में भी खोल दो तो चलने लगती है. बस गिलास, पानी और चखना का इंतजाम होना चाहिए. भिलाई शहर की ही बात करें तो लोग पटरी पार साइकिल, मोटर खड़ी कर जान हथेली पर लेकर दारू ठेके तक आते हैं. फिर क्या वजह है कि बीच शहर शराब की दुकानों का लाइसेंस दिया जाता है? लगातार विरोध के बावजूद इन्हें न तो हटाया जाता है और न ही बंद किया जाता है. शराब दुकानों का विरोध करते-करते कई लोग नेता बन गये.












