मध्यभारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर की पुत्री नगीन तनवीर को छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी से गहरा लगाव है. वे बासी और अंगाकर रोटी की मुरीद हैं. उनके पिता के साथ काम करने वाले और उन्हें चाहने वाले रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव में आज रंगमंच को जीवित रखे हुए हैं. राजनांदगांव प्रवास के दौरान नगीन ने छत्तीसगढ़ की लुप्त होती संस्कृति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी गीतों में भी अब हिन्दी का तड़का लग गया है. इनमें शुद्धता नहीं रही. फैशन के मारे लोग गोंदली, पनही, बंडी, अंगरखा, पपची सोहारी के विषय में नहीं जानते.












