आरक्षण पर जारी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. एसटी आरक्षण बढ़ाने का फैसला भाजपा का, कोर्ट में पराजय रमन सरकार की और ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा जा रहा है. इससे एक बात और साफ होती है कि एसटी आरक्षण को 20 से 32 करने का कोई बड़ा लाभ भाजपा को नहीं मिला था. तो फिर कांग्रेस इसे सीरियसली क्यों ले? भाजपा कह रही है कि कांग्रेस ने आरक्षण बचाने के लिए पर्याप्त दम नहीं लगाया. क्यों लगाती? साथ ही क्या भाजपा यह कहना चाहती है कि केस अपने मेरिट के कारण नहीं बल्कि बड़ा वकील खड़ा करने से जीता जा सकता है? ऐसे में तो गरीब को कभी न्याय मिलेगा ही नहीं.












