राजनीतिक दलों ने लगता है आम जनता को बेवकूफ समझ लिया है. विपक्ष केवल आरोप पर आरोप लगाता है. सत्ता पक्ष जवाब देता है तो ऐसा लगता है कि विपक्ष केवल झूठ बोल रहा है. प्रधानमंत्री आवासों को ही लें तो विपक्ष एकाएक जनता के दुख-दर्द का साथी बन गया है. जनता का दुख केवल डेढ़ कमरे के पक्के मकान में जा कर घुस जाने से दूर नहीं हो जाता. हर महीने उसकी रसोई का बिल बढ़ रहा है. सरकारें कुछ नहीं कर पा रही हैं. प्रधानमंत्री आवासों को लेकर विपक्ष ने तो बाकायदा मोर्चा खोल दिया है. वे विधानसभा का घेराव करने वाले हैं.












