“मेरे देश की धरती सोना-उगले, उगले हीरे मोती….” 1967 में आई फिल्म ‘उपकार’ का यह गीत तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ‘जय जवान जय किसान’ की तर्ज पर तैयार किया गया था. छत्तीसगढ़ राज्य गीत की भी एक पंक्ति कहती है -“सोनहा धाने के अंग लुगरा हरियर हे रंग…” पर जिनका वास्तविक इतिहास से कोई वास्ता नहीं, उनका इन बातों से क्या लेना देना? इसलिए जब कांग्रेस महाधिवेशन में खास मेहमानों का स्वागत सुनहरे रंग की मालाओं से किया गया तो सोशल मीडिया कूदकर इस नतीजे पर पहुंच गया कि हो-न-हो ये माला सोने की है. वह दावा कर बैठा कि यह माला 50 ग्राम सोने की है. गजब के पारखी निकले ये सोशल मीडिया वाले. 100 मीटर की दूरी से उन्होंने न केवल असली सोना पहचान लिया बल्कि उसका वजन भी बता दिया.












