भिलाई। किसी हादसे का शिकार हो जाना वैसे ही कम पीड़ादायक नहीं है. इसपर यदि इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़े तो तकलीफ और बढ़ जाती है. पिछले 25 वर्षों से लक्जरी बस चला रहे मो. शमी के साथ भी ऐसा ही हुआ. कई अस्पताल और मेडिकल कालेज घूमने के बाद अंततः वे हाइटेक सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल पहुंचे जहां उनकी न्यूरोसर्जरी की गई. अब वे पूरी तरह ठीक हैं.












