एक तरफ जहां शहरी आबादी इस भीषण गर्मी में भूजल को सड़कों पर बहाकर घर शुद्ध कर रही हैं वहीं गांव-गांव और पहाड़ों पर वर्षा जल को छेंकने की कोशिशें की जा रही हैं. यह छत्तीसगढ़ सरकार के नरवा-गरुवा-घुरवा-बाड़ी के अनुरूप भी है. शहरी आबादी जहां बोरिंग से निकले पानी को अपनी बपौती समझती है वहीं ग्रामीणों को भूजल और उसकी कीमत का खूब अंदाजा है. इसीलिए तो इस चिलचिलाती धूप में भी वे मनरेगा की मामूली मजदूरी पर तालाबों का गहरीकरण कर रहे हैं.












