हाईस्कूल और कालेज के बच्चों ने पढ़ाई को मजाक बना लिया है. अंग्रेजी के अक्षरों में हिन्दी लिख रहे हैं. अंग्रेजी में व्हाटसअप की भाषा का उपयोग कर रहे हैं. सवाल कुछ पूछा जा रहा है और जवाब कुछ और दे रहे हैं. कापी जांचने वाले भी परेशान. उत्तरों का क्रम इतना बिगड़ा हुआ होता है मानो किसी ने ताश की गड्डी को फेंट दिया हो. दस कापी जांचते तक टीचर खुद कन्फ्यूज हो जाता है कि किस उत्तर के कितने अंक देने हैं. भाषा पर बच्चों की पकड़ ऐसी कि कालेज पहुंचकर भी प्राचार्य को एक आवेदन नहीं लिखकर दे पाते.












