भिलाई। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की आज जयंती है. उनकी कहानियों में गरीब परिवारों की सहजता, सरलता, विपरीत परिस्थितियों में जीने की जिजीविषा का मार्मिक चित्रण दिख जाता है. उनकी कहानियों में दर्शाएं गए मानव चरित्र आज भी प्रासंगिक हैं. आधुनिक हिन्दी साहित्य के वे प्रथम रचनाकार थे जिन्होंने हिन्दी कहानियों को फंतासी युग से बाहर लाने का काम किया. साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान किसी भी सूरत में गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर या शरतचंद चट्टोपाध्याय से कम नहीं था पर उन्हें कभी वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वो हकदार थे.












