भिलाई। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी ही इसे भयावह बना देती है. यह हार्डवेयर नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर का प्राब्लम है. एक प्रशिक्षित और काबिल काउंसलर इसे ठीक कर सकता है. मानसिक व्याधियां पूरे शरीर को यहां तक कि सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है. विकट परिस्थितियों में यह जानलेवा भी हो सकता है. उक्त बातें एमजे कालेज के सहायक डायरेक्टर एवं प्राचार्य डॉ अनिल चौबे ने कही.












