बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद ने कहा है कि बिना ठोस प्रमाण के जीवनसाथी पर अवैध संबंधों जैसे गंभीर आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। डिवीजन बेंच ने दुर्ग फैमिली कोर्ट के आदेश को बदल दिया। साथ ही डॉक्टर पत्नी के द्वारा पति पर लगाए गए आरोप को निराधार माना है। पति की तलाक की अर्जी को मंजूर करते हुए गुजारा भत्ता के लिए पत्नी को 25 लाख रुपए देने का आदेश दिया है।












