इस सिंगर के लिए किशोर लगाते थे कुर्सी, लता भी करती थी कॉपी

इस सिंगर के लिए किशोर लगाते थे कुर्सी, लता भी करती थी कॉपी

सैयां दिल में आना रे… आकर फिर न जाना रे, कजरा मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला,  होली आई रे कन्हाई रंग बरसे, रेशमी सलवार कुर्ता जाली दा,  कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर, जैसे 6 हजार से अधिक गीत गाकर अमर हो गई शमशाद बेगम भारतीय फिल्मी संगीत वह पहली हस्ताक्षर हैं जिनका ऑडिशन केवल दो लाइन गाकर हो गया था। इस ऑडिशन के बाद उन्हें 12 गानों का कांट्रेक्ट मिला। उनकी उम्र तक 12 साल थी। शमशाद बेगम की गायकी ऐसी थी कि जब लता मंगेशकर ने फिल्मी संगीत की दुनिया में कदम रखा तो उन्हें भी शमशाद की तरह गाने के लिए कहा जाता था। यहां तक कि किशोर कुमार जैसे सिंगर उनके लिए कुर्सी उठाकर ले आते थे।

1930 के दशक में भारत-पाकिस्तान के बीच कोई सीमा-सरहद नहीं थी। लाहौर-बॉम्बे और कोलकाता में फिल्में बनना शुरू हो चुकी थीं, रेडियो का दौर भी आ चुका था और कुछ म्यूजिक कंपनियां गाने रिकॉर्ड कर बेचा करती थीं। लाहौर की जेनोफोन म्यूजिक कंपनी उन दिनों काफी मशहूर हुआ करती थी।

मशहूर संगीतकार गुलाम हैदर स्टूडियो में बैठे थे। तभी एक नौजवान 12 साल की एक बच्ची का हाथ थामे वहां पहुंचा। बच्ची किसी गरीब परिवार की जान पड़ती थी। युवक ने बताया कि वो बच्ची को उसके परिवार से छिपाकर यहां लाया था। गुलाम हैदर ऑडिशन के लिए तैयार हो गए। स्टूडियो में सन्नाटा पसर गया। बच्ची ने बहादुर शाह जफर की गजल मेरा यार मुझे मिले अगर गाना शुरू किया। अभी दो ही लाइन गाई होगी कि गुलाम हैदर ने गाना रुकवा दिया। हैदर ने अपने असिस्टेंट से कहा- बच्ची के साथ 12 गानों का कॉन्ट्रैक्ट बनवा लो। उसे हर वो सुविधा दो, जो टॉप सिंगर्स को दी जाती है।

वह बच्ची थी शमशाद बेगम (अप्रैल 14, 1919– अप्रैल 23, 2013)। वे भारत की पहली प्लेबैक सिंगर बनीं और ‘सैंया दिल में आना रे…’, ‘कजरा मोहब्बत वाला….’ और ‘मुगल-ए-आजम’ का मशहूर गाना ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमां कर हम भी देखेंगे…’, जैसे 6 हजार गाने गाए। करीब 100 साल बाद भी उनके गाने सुने और रीमिक्स किए जाते हैं।

लेजेंड्री सिंगर लता मंगेशकर भी शमशाद बेगम की फैन थीं। जब लता नई-नई गायकी में आईं तो उन्हें शमशाद की तरह गाने की सलाह दी जाती थी। एक दौर वो भी आया जब किशोर कुमार जैसे लीजेंड्री सिंगर भी शमशाद की खिदमद में कुर्सी उठाए पीछे-पीछे चलते थे।

जब सिंगर्स को एक गाने के लिए 100 रुपए फीस दी जाती थी, तब फिल्ममेकर्स शमशाद को 2000 रुपए फीस देने के लिए भी राजी हो जाया करते थे। पिता की शर्त में ताउम्र बुर्का पहनकर गाया। पाबंदी ऐसी कि जवानी के दिनों में कोई तस्वीर तक क्लिक नहीं करवाई। फिल्मों में हीरोइन बनने के बड़े मौके भी पिता के गुस्से के भेंट चढ़े।

शमशाद बेगम एक बहुमुखी कलाकारा थीं, जिन्होंने हिन्दी के अलावा बंगाली, मराठी, गुजराती, तमिल एवं पंजाबी भाषाओं में 6000 से अधिक गाने गाये थे। सन 2001 में भारत सरकार द्वारा उन्हें कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

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