छत्तीसगढ़ का वनाधारित आजीविका मॉडल बना देश के लिए मिसाल
महिला समूहों को 25 लाख रुपए से अधिक का लाभांश वितरित
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा विकसित वनाधारित आजीविका मॉडल आज अपनी सफलता की गूँज देशभर में फैला रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण के साथ-साथ लघु वनोपजों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के इस अनूठे मॉडल का अध्ययन करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर पहुँचा।
इस दल में अरुणाचल वन निगम के अध्यक्ष श्री नालोंग मिजे, विधायक श्री चौ जिंगनु नामचूम, उपाध्यक्ष श्री टी.जी. बाकि तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री पी. सुब्रमण्यम सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
भ्रमण के दौरान एक विशेष कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों को उनकी कड़ी मेहनत का फल 25 लाख 17 हजार 776 रुपए की लाभांश राशि के रूप में दिया गया। वन धन विकास केंद्र डॉगनाला, इच्छापुर, दुगली और विशेष पिछड़ी जनजाति (पीव्हीटीजी) केंद्र केशोडार की महिलाओं को लाभांश के चेक प्रदान किए गए। इस अवसर पर डीएफओ (कटघोरा) श्री कुमार निशांत सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने जमीनी स्तर पर हो रहे कार्यों को समझने के लिए विभिन्न केंद्रों का दौरा किया। राजनांदगांव में महुआ फूड प्रोसेसिंग यूनिट का अवलोकन कर आधुनिक तकनीक को समझा। कबीरधाम में वन धन शहद प्रसंस्करण केंद्र की कार्यप्रणाली देखी। दल ने “छत्तीसगढ़ हर्बल्स” के मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क और 67 प्रकार के लघु वनोपजों की एमएसपी पर खरीदी की व्यवस्था की सराहना की। उन्हें बताया गया कि राज्य में तेंदूपत्ता का देश में सर्वाधिक 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा मूल्य दिया जा रहा है।
अरुणाचल प्रदेश के दल ने छत्तीसगढ़ के इस मॉडल को ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट और प्रेरणादायी उदाहरण बताया। उन्होंने महिला समूहों की कार्यक्षमता से प्रभावित होकर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की। राज्य लघु वनोपज संघ के उपाध्यक्ष श्री यज्ञदत्त शर्मा और प्रबंध संचालक श्री अनिल कुमार साहू सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें छत्तीसगढ़ की वन संपदा व जनजातीय आजीविका के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
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