भारत की सड़कों पर भी दिखने लगा ईरान-अमेरिका युद्ध का असर
कोरबा। जिले की सड़कों का बुरा हाल है पर डामर मिल नहीं रहा। भारत अपनी जरूरत का 40 फीसदी हिस्सा आयात करता है। दरअसल, डामर कच्चे तेल की रिफाइनिंग से निकलने वाला एक बाईप्रॉडक्ट है। भारत में इसका उत्पादन इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियों की रिफाइनरियों में होता है। चूंकि कच्चा तेल अब बहुत कम आ रहा है, इसलिए डामर का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। उद्योग मंत्री ने सड़कों के संधारण में इसका विकल्प तलाशने के निर्देश दिए हैं।

वाणिज्य, उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, आबकारी व श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने अधिकारियों से कहा है कि मिडिल ईस्ट एशिया में युद्ध के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप हो रही डामर की अनुपलब्धता के कारण सड़कों के डामरीकरण का कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहे, जबकि राशि स्वीकृत कर निविदा आदि की कार्यवाही बहुत पहले की पूरी कर ली गई है, अतः उच्च स्तर पर चर्चा कर वैकल्पिक रास्ता निकाले तथा सड़कों की दशा सुधारें। देश में पराली से बायो टार भी निकाला जाता है पर इसकी मात्रा बहुत सीमित है।
उक्ताशय के निर्देश उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने यहांआयोजित विकास कार्याे की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को दिये। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बरसात से पूर्व नालों एवं नालियों का निर्माण कार्य अनिवार्य रूप से पूरा करायें, विकास कार्याे में अपेक्षित गति लायें तथा जिन निर्माण एजेंसियों द्वारा कार्याे में लापरवाही दिखाई जा रही है, उनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करें, उन्हें ब्लेकलिस्ट करें।
उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि बरसात आने में अब ज्यादा दिन नहीं है। निगम क्षेत्र की सभी प्रमुख सड़कों के डामरीकरण की स्वीकृति बहुत पहले प्राप्त हो चुकी है, निविदा आदि की कार्यवाही भी पूरी हो चुकी है, कार्यादेश भी दिये जा चुके हैं किन्तु डामर की अनुपलब्धता बनी हुई है, जिसके परिणाम स्वरूप कोरबा में भी सड़कों का डामरीकरण कार्य रूका हुआ है। उन्होंने कहा कि वे उच्च स्तर पर चर्चा करें तथा वैकल्पिक रास्ता निकालकर शहर की सड़कों को सुधारें ताकि आगामी बरसात में शहर वासियों को आवागमन में परेशानी का सामना न करना पडे़।
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