साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड मैनेजमेंट में खुलेगा रोजगार का पिटारा

साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड मैनेजमेंट में खुलेगा रोजगार का पिटारा

भिलाई। आज एआई, मशीन लर्निंग, डाटा साइंस, साइबर सुरक्षा और कई नए क्षेत्र हैं। क्या सिर्फ एआई ही दुनिया बदल रहा है? अगर एआई को पूरी दुनिया में चलना है, तो उसे सर्वर चाहिए, तंत्र चाहिए, व्यवस्था चाहिए। आपके व्हाट्सएप संदेश कहां जाते हैं? आपकी बातें कहां सुरक्षित रहती हैं? सबकुछ क्लाउड में जाता है। इसलिए आने वाले समय में क्लाउड, व्यवस्था संभालने और इसकी टेक्नोलॉजी के संचालन जैसे क्षेत्रों में बहुत अवसर आने वाले हैं। अगला जॉब ट्रेंड इसी एरिया में होगा। यह बातें लीडिंग टेक कंपनी अडोबी के ग्लोबल एचआर हैड समर्थ आर्या ने कहीं। वे शनिवार को रूंगटा यूनिवर्सिटी में हुए एचआर कॉन्क्लेव में बतौर वक्ता शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि, टेक इंडस्ट्री अब एआई की तरफ तेजी से बढ़ रही है। इसमें सबसे जरूरी चीज है साइबर सुरक्षा। जहां एआई होगा, वहां इसे ट्रेंड वाले लोग भी होंगे। इसलिए साइबर सुरक्षा वह क्षेत्र है जिस पर अब छात्रों बहुत ध्यान देना चाहिए। इसमें नौकरियों का पिटारा खुलने वाला है। कार्यक्रम में 10 लीडिंग टेक कंपनियों के एचआर शामिल हुए। कार्यक्रम में रूंगटा यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति संतोष रूंगटा, कुलपति डॉ. जवाहर सूरीशेट्टी, प्रो-चांसलर डॉ. सौरभ रूंगटा और सीईओ सोनल रूंगटा शामिल रहे।

लीडिंग टेक कंपनी फिनास्ट्रा के ग्लोबल एचआर हैड मोहिन मोहम्मद ने बताया कि अकसर लोग सवाल करते हैं कि, क्या कुछ ऐसी चीजें हैं जो एआई कभी नहीं कर सकता? अगर कोई कर्मचारी एक हफ्ते से काम पर नहीं आया और उसका काम भी अच्छा नहीं है, तो एआई कह सकता है यह संसाधनों की बर्बादी है, इसे निकाल दो। लेकिन एक इंसान समझ सकता है कि वह व्यक्ति किस परिस्थिति से गुजर रहा है। क्या वह मानसिक रूप से ठीक है? क्या उसके घर में कोई परेशानी है? यह समझ सिर्फ इंसान में होती है।

ऑटोरैबिट के ग्लोबल हैड प्यूपल ऑपरेशन संकेत रामकृष्णमूर्ति ने बताया कि जिन नौकरियों या कार्य क्षेत्रों में एआई के जरिए ज्यादा ऑटोमेशन हो सकता है, वे खतरे में हैं। और जहां एआई आपकी क्षमता बढ़ाती है, वहां आप कमाल कर सकते हैं और दुनिया बदल सकते हैं। अगर आप यूट्यूब या पॉडकास्ट देखते हैं, तो आप बड़ी कंपनियों के सीईओ को कहते सुनेंगे कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का स्वरूप 2029 तक बदल जाएगा। आज स्टार्टअप्स में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनी एआई सब्सक्रिप्शन पर ज्यादा पैसा खर्च करे या ज्यादा लोगों को नौकरी पर रखे। अगर कंपनी एआई की दौड़ में आगे रहना चाहती है, तो वह भर्ती कम करती है और एआई पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

टेक्नोलॉजी कंपनी अधीक साइंटेक के फाउंडर एंड सीईओ डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी आगे की बात हो रही है। नए जमाने में एजीआई आने वाला है। एजीआई एक ऐसी उन्नत एआई तकनीक है, जो इंसानों की तरह सोचने, समझने और सीखने की क्षमता रखती है। सामान्य एआई केवल कोई विशेष काम कर सकती है, लेकिन एजीआई कई प्रकार के कार्य एक साथ करने में सक्षम होगी। आने वाले समय में एजीआई शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है। अस्पतालों में मरीजों की जांच से लेकर स्कूलों में पढ़ाई को आसान बनाने तक, इसका उपयोग कई जगह किया जा सकता है।

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