CBSE क्लास 9 की तीन भाषा वाली अनिवार्यता के खिलाफ PIL दाखिल

CBSE क्लास 9 की तीन भाषा वाली अनिवार्यता के खिलाफ PIL दाखिल

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से घोषित की गई नई ‘तीन भाषा नीति’ (Three-Language Policy) का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया है। सीबीएसई के इस नए नियम को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी ने इस गंभीर मामले को शीर्ष अदालत के समक्ष पेश किया।

अदालत में अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, “छात्र अचानक इन भाषाओं को कैसे सीख सकते हैं और फिर कक्षा 10वीं की परीक्षा कैसे दे सकते हैं? इस फैसले से छात्रों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन जाएगा।” मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा, “हम इस मामले पर अगले हफ्ते सुनवाई करेंगे।”

इससे पहले, सीबीएसई ने आगामी 1 जुलाई से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का नियम अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, बोर्ड ने यह भी साफ किया था कि कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा के लिए कोई मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।

सीबीएसई द्वारा जारी किए गए सर्कुलर में कहा गया था कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा नौवीं (IX) के लिए तीन भाषाओं (R1, R2, R3) की पढ़ाई करना पूरी तरह अनिवार्य होगा। इसके साथ ही शर्त यह भी रखी गई थी कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं मूल रूप से भारतीय (Native Indian Languages) होनी चाहिए।

सीबीएसई के सर्कुलर के मुताबिक, तीन भाषाओं में से कम से कम दो मूल भारतीय भाषाओं को रखने का यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE) 2023 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।

इस नीति के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में भाषा के विषयों को तीन अलग-अलग स्तरों (R1, R2 और R3) में विभाजित किया जाना है। इसमें R1 (भाषा 1) छात्र की मुख्य भाषा होगी, R2 एक अलग भाषा होगी और R3 (तीसरी भाषा) होगी। इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6वीं से ही इस नियम को अनिवार्य किया जाना है और साल 2030-31 तक इसे कक्षा 10वीं तक पूरी तरह से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

बोर्ड के नए नियमों के तहत छात्रों के पास भाषाओं को चुनने के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन R1 और R2 के स्तर पर चुनी गई भाषाएं एक जैसी नहीं हो सकती हैं। साथ ही, किसी भी एक भाषा को एक से अधिक स्तर पर एक साथ नहीं पढ़ाया जा सकता है।

सीबीएसई के आधिकारिक नोटिफिकेशन में उल्लेख किया गया है कि इन स्वीकृत भाषाओं में भारत की दो आधिकारिक भाषाएं यानी हिंदी और अंग्रेजी शामिल हैं। इसके अलावा 42 अन्य भाषाओं को भी इसमें जगह दी गई है। इस तरह, भारत के संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी अधिसूचित भाषाओं के साथ-साथ अन्य भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं को भी छात्रों के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है।

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