मोर गांव, मोर पानी : दंतेवाड़ा में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को मिली नई दिशा

मोर गांव, मोर पानी : दंतेवाड़ा में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को मिली नई दिशा

दंतेवाड़ा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत जिले में पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण वृद्धि तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं जल संवर्धन संबंधी कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में “मोर गांव, मोर पानी” महाअभियान के तहत जिले के विभिन्न ग्रामों में जनभागीदारी के साथ अनेक उल्लेखनीय एवं स्थायी कार्य संपादित किए गए हैं,जिनके सकारात्मक परिणाम ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

मनरेगा के तहत वर्षभर संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम पंचायतों, शासकीय भूमि, विद्यालय परिसरों, पंचायत भवनों, चारागाह क्षेत्रों तथा सड़क किनारे बड़ी संख्या में पौधों का रोपण किया गया। लगाए गए पौधों में फलदार, छायादार एवं पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई। पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नियमित सिंचाई, सुरक्षा घेराबंदी तथा सामुदायिक निगरानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इस पहल से न केवल हरित क्षेत्र में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।
गांव-गांव में जल संरचनाओं के निर्माण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया गया। डबरी निर्माण, लूज बोल्डर चेकडैम, परकोलेशन टैंक तथा जलग्रहण क्षेत्र विकास जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर संपन्न किए गए। इन प्रयासों से वर्षा जल का अधिकतम संचयन संभव हुआ है तथा भूजल स्तर में सुधार के सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए हैं।
अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, किसानों एवं ग्रामीण समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई। ग्रामीणों ने श्रमदान एवं जनसहयोग के माध्यम से जल संरक्षण कार्यों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई ग्रामों में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन से सिंचाई क्षमता बढ़ी है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होने के साथ किसानों को आर्थिक लाभ भी प्राप्त हो रहा है। जिले में किए गए इन कार्यों के परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण, जल उपलब्धता, रोजगार सृजन तथा ग्रामीण आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल हुई हैं। मनरेगा के माध्यम से हजारों मानव दिवसों का रोजगार सृजित हुआ, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है। वहीं वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण गतिविधियों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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