कोसा सिल्क हमारी समृद्ध हाथकरघा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
चांपा। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले के चांपा में भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, चांपा में विधि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जांजगीर-चांपा जिले के बुनकरों ने अपनी पीढ़ी-दर-पीढ़ी की कला और बेहतरीन हथकरघा तकनीकों से बनी चांपा का कोसा सिल्क पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। बुनकरों के कड़े परिश्रम और अनूठी डिजाइनिंग के कारण ही चांपा को कोसा नगरी के रूप में वैश्विक पहचान मिली है। छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध कोसा सिल्क हमारी समृद्ध हस्तकरघा परंपरा, कुशल बुनकरों की मेहनत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों ने चांपा की समृद्ध कोसा परंपरा, स्थानीय बुनकरों के हुनर और युवा प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान किया। पारंपरिक कौशल, आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और बाजार की मांग के बीच बेहतर समन्वय से चांपा के कोसा एवं हाथकरघा उत्पादों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में इन आयोजनों को महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर कोसा सेवा केन्द्र, रायगढ़ द्वारा चांपा में कोसा प्रदर्शनी, फैशन शो, निबंध, रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। संस्थान के द्वारा प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया। अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और हाथकरघा एवं कोसा से निर्मित उत्पादों की सराहना की।
हाथकरघा परंपरागत बुनकरों के हुनर और कोसा वस्त्रों की विशिष्ट पहचान के संबंध में विधायक श्री ब्यास कश्यप ने कहा कि चांपा के कोसा बुनकरों और शिल्पकारों के अथक परिश्रम एवं हुनर ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि बुनकरों की समृद्ध परंपरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इसे संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्थानीय हाथकरघा उत्पादों के अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया।
पूर्व सांसद कमला देवी पाटले ने कहा कि चांपा का कोसा अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और बुनकरों के अद्भुत कौशल के कारण विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
कलेक्टर जांजगीर-चाम्पा ने कहा कि यह दिवस देश के बुनकरों, शिल्पकारों और उनकी समृद्ध परंपरा के सम्मान का अवसर है। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस का संबंध स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन से है, जिसने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग का संदेश दिया। उन्होंने बुनकरों एवं शिल्पकारों को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस की शुभकामनाएं दीं। कलेक्टर जांजगीर-चाम्पा ने कहा कि चांपा का कोसा अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और बुनकरों के उत्कृष्ट कौशल के कारण देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर पहचान बना चुका है। उन्होंने नागरिकों से स्थानीय बुनकरों द्वारा निर्मित कम से कम एक कोसा अथवा हाथकरघा उत्पाद का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से बुनकरों की आजीविका सशक्त होगी और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बदलते बाजार और उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुरूप पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, चांपा के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। संस्थान को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। आगामी तीन वर्षों में 900 से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री मोतीलाल देवांगन, पुलिस अधीक्षक, कोसा सेवा केन्द्र रायगढ़ की सहायक संचालक सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बुनकर, शिल्पकार एवं भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, चांपा के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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